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Showing posts from May, 2017

पेड़ लगाओं

पेड़ लगाइन आवा गहना सजाइन, अपन धरती बर पेड़ लगाइन। पेड़ पौधा अउ रुख राई, आवा मिलके सबो भाई| नवा चेतना हमन जगाइन, गहना सजाइन अपन धरती बर पेड़ लगाइन| पेड़ ल अपन बेटा मानव, बेटा जैसे ओला सवारव| वो ह अइसनहा बेटा बनही, जेन ह निस्वार्थ , दुःख पीरा ल हरही। आवा अब मत लजाइन | गहना सजाइन अपन धरती बर पेड़ लगाइन| पेड़ लगाये म पुन मिलथे, जड़ी बूटी फल फूल मिलथे| आवा पेड़ के गुन ल गाइन। गहना सजाइन अपन धरती बर पेड़ लगाइन। गुरतुर गुरतुर फर, महमहावत फूल हे| आवा मिल के मीठ मीठ खाइन, गहना सजाइन अपन धरती बर पेड़ लगाइन। पेड़ ह पानी ल लाथे। जब संसार ह सुखा जाथे। भूमि ल कटे ले बचाथे।। अपन नदी नरवा ल मत सुखवाईन। गहना सजाइन  अपन धरती बर पेड़ लगाइन।। डॉ. प्रदीप निर्णेजक

पर्यावरण

कल तक तो सुस्ताते थे , मेरी छाँव में। आज मेरे ही जड़ को काटने आये है, दबे पाँव में। अब तक तो धरोहर था, इस गाँव में। मुझे काटने आये है, दबे पाँव में। जब जाना था नदी पार, तब बैठ जाते थे मेरे नाव में। मुझे काटने आये है, दबे पाँव में। कितनी मीठी आवाज थी, चिड़ियों की। शोरगुल होता था, कौओं की काँव काँव में। मुझे काटने आये है, दबे पाँव में। डॉ. प्रदीप निर्णेजक परसदा

जिन्दगी उसी की

जिंदगी उसी की जिंदगी उसी की जिसे मुस्कुराना आ गया। जिंदगी उसी की जिसे गम भूलना आ गया।। जीते तो सभी है, इस जहान में। पर जीना  उसी का जीना । जिसे झुककर सलाम करना आ गया। लोग गिरते उठते है, चलते है, दौड़ते है। जिंदगी में नए नए आयाम गढ़ते है। जिंदगी उसी की जिसे गिरकर चलना आ गया। लोग हताशा में क्यों चले जाते हैं। अपने सोच के कारण ही तो, जिंदगी भर दुःख पाते है। जिंदगी उसी की जिसे गम भूलना आ गया। जिंदगी उसी की जिसे मुस्कुराना आ गया। जिन्होंने जाना समय को , उपलब्धि उन्होंने पाई है। हासिल किया मुकाम को, लोगों ने उन्हीं की गाई है। जिंदगी उन्हीं की जिसे कुछ करना आ गया। अपने लिए तो सब जीते है, अहम जिंदगी भर पीते है। पर लोग वहीं जो दूसरों को भा गया। जिंदगी उसी की जिसे औरों के लिए जीना आ गया। डॉ. प्रदीप निर्णेजक