जिन्दगी उसी की

जिंदगी उसी की

जिंदगी उसी की जिसे मुस्कुराना आ गया।
जिंदगी उसी की जिसे गम भूलना आ गया।।
जीते तो सभी है,
इस जहान में।
पर जीना  उसी का जीना ।
जिसे झुककर सलाम करना आ गया।
लोग गिरते उठते है,
चलते है, दौड़ते है।
जिंदगी में नए नए आयाम गढ़ते है।
जिंदगी उसी की जिसे गिरकर चलना आ गया।
लोग हताशा में क्यों चले जाते हैं।
अपने सोच के कारण ही तो,
जिंदगी भर दुःख पाते है।
जिंदगी उसी की जिसे गम भूलना आ गया।
जिंदगी उसी की जिसे मुस्कुराना आ गया।
जिन्होंने जाना समय को ,
उपलब्धि उन्होंने पाई है।
हासिल किया मुकाम को,
लोगों ने उन्हीं की गाई है।
जिंदगी उन्हीं की जिसे कुछ करना आ गया।
अपने लिए तो सब जीते है,
अहम जिंदगी भर पीते है।
पर लोग वहीं जो दूसरों को भा गया।
जिंदगी उसी की जिसे औरों के लिए जीना आ गया।

डॉ. प्रदीप निर्णेजक


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